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भागलपुर: सैकड़ों आवेदकों को भेज दिया फर्जी नियुक्ति पत्र, जानिए… क्या है मामला

भागलपुर: चतुर्थ वर्गीय पद पर बहाली के लिए पूर्व में मांगे गए आवेदन पर शासन की ओर से पैनल निर्माण और बहाली की प्रक्रिया धरातल पर भले नहीं आई हो पर इसको लेकर बड़ी जालसाजी का खेल चालू है। बहाल होने की आस में भागलपुर, बांका समेत आसपास के क्षेत्र में रहने वाले सैकड़ों बेरोजगार आवेदकों से लाखों का चूना लगाया जा रहा है। ऐसे आवेदकों के घरों पर सीधे नियुक्ति पत्र भेजे जाने लगे हैं। वह भी बाकायदा बिहार सरकार के मोनोग्राम और सत्यमेव जयते के प्रतीक चिह्न वाले लेटर हेड में।

जी हां अबतक ऐसी नियुक्ति पत्र लेकर कई आवेदक झांसे में आकर 20,500 रुपये की सुरक्षा राशि जालसाज के हाथों में जमा करा चुके हैं। जिन आवेदकों ने नियुक्ति पत्र को लेकर भागलपुर समाहरणालय, प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय पहुंच तहकीकात करने का प्रयास किया उन्हें झटका लगा है। हालांकि नियुक्ति पत्र पाए आवेदक मुहम्मद शाहनवाज आलम, स्वर्णिम पांडेय, अजय कुमार, दिलीप कुमार, सुजीत कुमार सिंह आदि का कहना था कि तहकीकात में उन्हें कोई संतोषजनक जवाब ही नहीं दिया गया। उन्हें समाहरणालय, आयुक्त कार्यालय से बैरंग वापस कर दिया गया।

वहां उन्हें यह बताया गया कि उन्हें ऐसी नियुक्ति पत्र से कोई लेना-देना नहीं। आवेदकों का कहना है कि अगर नियुक्ति पत्र जालसाजी के तहत उनके घरों तक पहुंचाया गया तो ऐसा हुआ कैसे? उनलोगों ने आवेदन दिया इनकी भनक जालसाजी करने वालों को कैसे लगी? आवेदक चाहते थे कि उक्त नियुक्ति पत्र को लेकर प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई कराई जाए ताकि बेरोजगारों के साथ ठगी ना हो सके। इनका कहना था कि नियुक्ति पत्र जिस तरीके से भेजा गया है कि प्रथम दृष्ट्या कोई भी झांसे में आ जाए। क्योंकि नियुक्ति पत्र उनके घरों पर ही भेजा जा रहा है जो आवेदक हैं।

तैयार पैनल में शामिल हैं आप, नहीं होगी कभी परीक्षा या साक्षात्कार

भेजे गए नियुक्ति पत्र में कथित रूप से चयनित आवेदकों को यह भरोसा दिलाया जा रहा है कि आपके नाम तैयार पैनल में शामिल हैं। आपको भविष्य में कभी कोई परीक्षा या साक्षात्कार से सामना नहीं करना पड़ेगा। उनका चयन सीधी भर्ती से मेरिट के आधार पर हुआ है। जालसाजी करने वाले ने आवेदकों को सुरक्षा राशि दो दिनों के अंदर जमा करने को कहा है। यह भी साफ कर दिया है कि दो दिनों के अंदर सुरक्षा राशि देने पर ही उन्हें तीन माह के प्रशिक्षण में शामिल होने का पत्र सौंपा जाएगा। उन्हें सेवानिवृति बाद पेंशन का लाभ नहीं दिए जाने की बात कही गई है। आवेदकों को नियुक्ति पत्र भेजने वाले का नाम डॉ. डीके शर्मा, मुख्य आयुक्त बिहार सरकार दर्शाया गया है। लेटर हेड पर बाकायदा बिहार सरकार पटना की मुहर भी है।

स्थापना शाखा के वरीय उप समाहर्ता दीपू कुमार ने कहा कि यह सरासर फर्जी मामला है। इसके झांसे में किसी को पडऩे की जरूरत नहीं है। इस पत्र से किसी को नौकरी नहीं मिलने वाली है। लोगों से ऐसे पत्रों पर नोटिस नहीं देने की अपील है। कई मामले संज्ञान में आया है। प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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