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Published On: Mon, Oct 8th, 2018

भागलपुर : पत्नी की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए फिर थामा बल्ला, ट्रॉफी में चौके-छक्के की बरसात

भागलपुर करीब छह साल क्रिकेट से बिल्कुल अलग रहे लेकिन बीमार पत्नी की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए शहर के बरहपुरा के रहमतउल्लाह उर्फ शाहरूख ने दोबारा बल्ला थामा तो पीछे मुड़कर नहीं देखा। सैंडिस कंपाउंड मैदान में क्रिकेट की बारीकियां सीखने वाले रहमतउल्लाह इस समय गुजरात के वडोदरा में चल रहे विजय हजारे ट्रॉफी के मैच में बिहार टीम की ओर से चौके-छक्कों की बरसात कर रहे हैं।

उनकी धुआंधार बल्लेबाजी की बदौलत बिहार टीम ने अब तक छह मैच जीते हैं। रहमत के प्रदर्शन पर उनका बिहार की रणजी टीम में शामिल होना लगभग तय माना जा रहा है। इस तरह वह इंडियन क्रिकेट टीम की दहलीज पर पहुंच चुके हैं। विजय हजारे ट्राॅफी का आयोजन बीसीसीआई करता है।

क्रिकेटरों की नजर में बेस्ट फिनिशर हैं रहमत : रहमतके लिए बड़ी बात यह है कि वडोदरा में उनकी बल्लेबाजी को देखकर बीसीसीआई के अधिकारी उसका भविष्य टीम इंडिया में देख रहे हैं। रहमत क्रिकेटरों की नजर में बेस्ट फिनिशर हैं। फ्लाइंग शॉर्ट हो या स्वीप शॉर्ट, दोनों में निपुण हैं।

क्रिकेट भले विरासत में मिली, पर मुकाम बनाने के लिए मेहनत की। बताते हैं कि दो साल की उम्र में अब्बा चल बसे थे। पेंशन से घर चलता था। अब्बा के इंतकाल पर बड़े भाई की नौकरी लगी। छह भाई व दो बहनों में वे सबसे छोटे हैं। दो भाई भी क्रिकेटर रहे हैं।

पत्नी सबा कुद्दुस के बीमार होने पर क्रिकेट छोड़ दी थी। लेकिन उनके कहने पर ही फिर बल्ला थामा। रहमत कहते हैं-पत्नी के कहे शब्द-मैं तो कुछ दिन की मेहमान हूं। मरना तय है। आप फिर से खेलो, क्रिकेट की ऊंचाई चूमो। शायद मेरी आत्मा को शांति मिले.. से प्रेरित होकर दोबारा मैदान में उतरे।

मोहल्ले की गलियों से की शुरुआत : रहमत ने वडोदरा से फोन पर बताया कि बड़े भाई जब घर में बल्ला रखकर कहीं जाते थे तब वे चुपके से उनकी नकल करते थे। मोहल्ले की गली में ही साथियों के साथ क्रिकेट खेलते थे। बरहपुरा ईदगाह मैदान से क्रिकेट की शुरुआत करते-करते वह भीखनपुर के सैयद उर्दू स्कूल टीम से खेलने लगे।

पत्नी की बीमारी से बीच में छूटा खेल : रहमत के दोस्त क्रिकेटर मोती बताते हैं कि उस पर क्रिकेट में अल्लाह की रहमत है। उसने निजी जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव देखे। बल्ला भांजने के दौरान कब वह पारिवारिक बंधन में पड़ गया, उसे खुद पता नहीं चला। इसी बीच हंसते-खेलते परिवार पर कहर बरपा और उसकी नई नवेली पत्नी गंभीर बीमारी की चपेट में आ गई।

हेमन ट्राॅफी में भी किया था बेहतर प्रदर्शन : जिला क्रिकेट संघ के संयुक्त सचिव सुबीर मुखर्जी उर्फ मामू बताते हैं कि रहमत सभी फॉरमेट में सफल रहा। इसी साल सैंडिस मैदान में संपन्न हुए हेमन ट्राॅफी मैच में भागलपुर की जीत में उसका बड़ा योगदान था। उसने सात सौ से ज्यादा रन बनाए थे। तीन शतक लगाए थे। एक बार 199 पर आउट हुआ था। वह तभी सेलेक्टर की नजर में आ गया। जब पटना में कैंप सेलेक्शन हुआ तब भी रहमत का जलवा कायम रहा

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