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बिहार : नियोजित शिक्षकों का वेतन बढ़ाएगी सरकार.. उप मुख्यमंत्री ने की घोषणा, 8868 करोड़ रुपये

पटना : सरकार नियोजित शिक्षकों का वेतन शीघ्र बढ़ाएगी। नियोजित शिक्षकों के प्रति सरकार संवेदनशील है। लेकिन समान काम के बदले समान वेतनमान नहीं देगी।

उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने मंगलवार को विधान परिषद में तृतीय अनुपूरक बजट पर सरकार के जवाब पर चर्चा के दौरान सदन को यह जानकारी दी। 8868 करोड़ रुपये का तृतीय अनुपूरक बजट विधान परिषद से पारित हो गया।

बकौल सुशील मोदी, मुख्यमंत्री ने कह दिया है कि शिक्षकों का वेतन बढ़ेगा। उन्होंने तृतीय अनुपूरक बजट से विभिन्न योजना मद में खर्च की जाने वाली राशि के बारे में विस्तार से योजनावार जानकारी दी।

इससे पूर्व उप मुख्यमंत्री ने बिहार विनियोग विधेयक 2020 सदन में पेश किया और इसके जरिए राशि खर्च की अनुमति ली। इसमें सबसे अधिक प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रमीण के तहत 2248 करोड़ रुपये गरीबों के आवास निर्माण पर खर्च होंगे। इसी प्रकार 1000 करोड़ गली-नाली पक्कीकरण योजना, 402 करोड़ नियोजित शिक्षकों के वेतन, कृषि के लिए 144 करोड़, 251 करोड़ सहकारिता आदि के लिए दिए गए हैं। इससे पूर्व तृतीय अनुपूरक बजट पर चर्चा में विपक्ष के केदार पांडेय, प्रेम चंद्र मिश्र, राधा चरण सेठ और रामचंद्र पूर्वे शामिल हुए। जबकि सत्ता पक्ष की ओर से चर्चा में हीरा ¨बद, रामवचन राय और अवधेश नारायण सिंह शामिल हुए। केदार पांडेय ने सरकार का ध्यान वित्त रहित शिक्षकों की ओर आकृष्ट किया। उन्होंने संस्कृत, मदरसा और वित्त रहित शिक्षकों की कठिनाईयों से सदन को अवगत कराया।

शिक्षकों से वार्ता करे सरकार : भाजपा विधान पार्षद नवल किशोर यादव ने शून्यकाल में सदन को बताया कि नियोजित शिक्षकों को काम पर वापस आने के लिए धमकाया जा रहा है। बर्खास्त किया जा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और शिक्षा मंत्री वेतन बढ़ाने का एलान कर चुके हैं। ऐसे में अब जरूरत इस बात की है कि शिक्षा मंत्री शिक्षक संगठनों को आमंत्रित कर वार्ता की पहल करें। नवल किशोर यादव ने कहा कि हड़ताल खत्म कराने के लिए शिक्षकों को धमकाना अच्छी बात नहीं। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले में पहल करे। शिक्षकों की हड़ताल का असर है कि वित्त रहित शिक्षण संस्थान के शिक्षक भी उनके साथ आ गए हैं। चूंकि उन्हें भी अनुदान नहीं दिया जा रहा है।

कार्यस्थगन मंजूर नहीं होने पर भाकपा (माले) वेल में पहुंचा

पटना : विधानसभा में शून्यकाल आरंभ होने से पहले विधानसभा अध्यक्ष ने जैसे ही यह सूचना पढ़ी कि महबूब आलम, सुदामा प्रसाद और नवाज आलम ने जो कार्यस्थगन प्रस्ताव दिया था उसे अस्वीकृत किया जाता है, वैसे ही भाकपा (माले) विधायक पोस्टर के साथ वेल में आकर नारेबाजी करने लगे। विधानसभा अध्यक्ष ने वेल में पहुंचे विधायकों से यह निवेदन किया कि शून्यकाल होने दीजिए। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि तीन लोग तीन तरह के पोस्टर लिए हुए हैं। एक में बटाईदार, दूसरे में धानक्रय और तीसरे में कदवन जलाशय का मामला है। कृषि पर चर्चा में उटाइएगा। विधानसभा अध्यक्ष ने कई बार अनुरोध किया कि अब बैठ जाइए। इसके बाद वेल में खड़े विधायक अपनी सीट पर जाकर बैठ गए।

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