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फिर चमक उठेगा लक्ष्मी विलास पैलेस, कभी दरभंगा महाराज ने बिहार को दिया था दान

कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय दरभंगा में स्थित ऐतिहासिक लक्ष्मी विलास पैलेस का नवीनीकरण होने जा रहा है. बिहार राज्य आधारभूत संरचना निगम की 6 सदस्यीय टीम ने इसका निरीक्षण किया है. जल्द ही यह ऐतिहासिक धरोहर अपने अस्तित्व की विरासत की मजबूती हासिल करेगी.

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सर्व नारायण झा ने मुख्यालय के ऐतिहासिक मुख्य भवन लक्ष्मी विलास पैलेस के नवीकरण का जो सपना देखा था, वह अब फलीभूत होने वाला है. खुशी की बात यह है बिहार राज्य आधारभूत संरचना निगम की टीम के विशेषज्ञों ने भवन का तकनीकी मुआयना किया. भवन चारों तरफ घूम-घूमकर टीम के लोगों ने सभी कोनों की फोटोग्राफी की और जरूरत के हिसाब से मरम्मती के लिए एक चार्ट भी तैयार किया. टीम के साथ कुलपति सहित विश्वविद्यालय के कई अधिकारी मौजूद थे.

भवन की वास्तविकता को नहीं बदला जाएगा
वहीं कुलपति प्रोफेसर झा का कहना था कि किसी भी सूरत में भवन की वास्तविक पहचान को प्रभावित नहीं किया जायेगा. यानी इसकी मौलिकता अक्षुण्ण रहेगी. उन्होंने कहा कि वे इस कार्य के लिए सरकार से कई बार अनुरोध कर चुके हैं. उन्होंने प्रधान सचिव के प्रति आभार व्यक्त किया कि उन्हीं की पहल से आज विशेषज्ञों की टीम यहां आ पाई. अब इस ऐतिहासिक धरोहर का पुर्नजन्म होना तय हो गया है.

रक्षा करना कर्तव्य
प्रोफेसर झा ने कहा कि महाराजाधिराज ने जिस उत्साह और संकल्प के साथ इस भवन को संस्कृत के सम्बर्धन व उसके संरक्षण के लिए दान दे दिया था. उसकी रक्षा करना हम सभी का कर्तव्य है. साथ ही उन्होंने बताया कि पूरे भवन की हाई स्केल पर पहले फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी करा कर उसे सुरक्षित रखी जायेगी. उसके बाद ही रिनोवेशन का काम होगा ताकि नवीकरण में किसी तरह का बदलाव नहीं हो पाए. बता दें कि टीम में आर्टिटेक्ट और इंजीनियरिंग के विशेषज्ञ शामिल थे.

लक्ष्मी विलास पैलेस के बारे में-

महाराजा कामेश्वर सिंह का अतिप्रिय महल था लक्ष्मी विलास.
महाराजा कामेश्वर सिंह ने बिहार को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में ले जाने के लिए अपना सर्वस्व सम्पत्ति दान में दे दी.
1960 में राजा ने दो विश्वविद्यालयों को दान में दिया.
पहला विश्वविद्यालय कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय पड़ा. दूसरा ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के नाम से जाना जाता है.
महाराजा ने सामान्य विषयों की पढ़ाई और देश की संस्कृति की रक्षा के लिए संस्कृत की पढ़ाई शुरू हो इस उद्देश्य से विश्वविद्यालयों को दान में दिया.

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