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पटना एम्स में मरीजों को ऑपरेशन के लिए नहीं करना होगा इंतजार, पूजा-पाठ कराकर शुरू

पटना एम्स के मॉड्यूलर ओटी जुलाई महीने के अंत तक शुरू हो जाएंगे। अभी तक एम्स में सिर्फ 14 ओटी से ही काम चलाया जाता था। अतिरिक्त 20 नये ओटी के शुरू होने से एम्स का सर्जरी वाला हिस्सा पूर्ण रूप से कार्य करने लगेगा। सबसे अधिक फायदा मरीजों को होगा। सर्जरी के लिए अब न तो मरीजों को इंतजार करना पड़ेगा और न ही सर्जनों को ऑपरेशन के लिए। एम्स के सभी 34 ओटी को विभागवार देने की प्रक्रिया शुरू है गई है। अभी संभावित 22 जुलाई को पूजा-पाठ कराकर ओटी में सर्जरी शुरू कर दी जाएगी।

अभी तक एम्स में सर्जरी के सभी विभागों को 14 ओटी में ही सर्जरी करना पड़ता था, जिसके कारण सप्ताह में किसी को एक दिन तो दूसरे को दो दिन ही सर्जरी करने का मौका मिलता था, जिसके कारण गंभीर बीमारी वाले मरीजों को भी सर्जरी के लिए इंतजार करना पड़ता था। सभी ओटी शुरू होने से प्रत्येक विभाग स्वतंत्र हो जाएगा।

यानी एक विभाग को एक ओटी में सातों दिन सर्जरी करने का मौका मिलेगा। एम्स के इमरजेंसी एंड ट्रॉमा के हेड डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि पहले से ट्रॉमा को चार ओटी दिये गये थे लेकिन सभी ओटी काम नहीं करने से एक में ही ट्रॉमा का केस लिया जाता था और बचे हुए ट्रॉमा के तीन ओटी ईएनटी, ऑर्थो और न्यूरो सर्जरी को दिया गया था। लेकिन अब चारों ओटी ट्रॉमा को मिल जाएगा, जिससे सभी को लाभ होगा।

एम्स में 1050 बेड हो गए सक्रिय

एम्स के निदेशक डॉ. प्रभात कुमार सिंह ने बताया कि एम्स में 400 अतिरिक्त बेड को सक्रिय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस महीने के अंत में एम्स के सभी 1050 बेड सक्रिय हो जाएंगे, जिससे मरीजों को काफी लाभ होगा। अभी पटना एम्स में 650 बेड पर मरीजों का इलाज चल रहा है। विभागवार अतिरिक्त बेडों का बंटवारा का काम भी शुरू कर दिया गया है। वहीं एम्स के सभी 34 ओटी भी इस महीने के अंत तक शुरू कर दिये जाएंगे। एम्स में कुल करीब 1050 बेड की सुविधा देने के लक्ष्य को पूरा कर लिया गया है।

विश्व स्तर का है मॉड्यूलर ओटी

एम्स में मॉड्यूलर ओटी बनाया गया है, जिसे विश्व स्तर के मानकों पर तैयार किया गया है। इसमें हेपाफिल्टर तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। ओटी में शुद्ध हवा मरीज को मिलेगी। संक्रमण होने की आशंका तक नहीं रहेगी। सभी सिस्टम टच स्क्रीन और सेंसर के जरिए काम करेंगे। ऑटोमेटिक वॉयस सिस्टम से भी लैस है। ओटी की लाइट जरूरत के मुताबिक सेट की जा सकती है। प्रत्येक विभाग का ओटी एक-दूसरे से जुड़ा रहेगा। खास बात यह है कि मेडिकल छात्र प्रत्येक ओटी में होने वाले ऑपरेशन को अपने सेमिनार रूम में लाइव देख सकते हैं।

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