धर्म : सौभाग्य योग में काली और स्थिर लग्न में होगी लक्ष्मी पूजा, सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त वृष लग्न सायं

लक्ष्मी पूजा को लेकर बाजार में गुरुवार को लोगों ने लक्ष्मी गणेश की प्रतिमा, झाड़ू आदि की खरीदारी की। कार्तिक मास कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथि को मां लक्ष्मी पृथ्वीलोक में आती है। जहां उन्हें श्रद्धा, सफाई तथा सामर्थ्य के अनुसार भक्ति मिलती है वहीं वास करती है। दिवाली के दिन घर की सफाई कर संध्या में प्रदोष या निशीथ काल के दौरान स्थिर लग्न में लक्ष्मी-गणेश की पूजा धन-वैभव बढ़ाने वाली होती है। महालक्ष्मी पूजा स्थिर लग्न में बहुत ही शुभ फल देने वाली होती है। स्थिर लग्न चार हैं। कुंभ, मीन, उड़ीसा और सिंह लग्न। कुंभ लग्न की पूजा जो स्थिर लग्न है। यह दिन में 12: 57 से 2:28 बजे तक। वृष लग्न 12:04 से 2:19 तक रहेगा। इसमें महालक्ष्मी की पूजा व धनाधिपति कुबेर आदि की पूजा करना बहुत ही शुभ फलदायी होगा। लक्ष्मी पूजन का सबसे सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त वृष लग्न सायं 5:33 से 7:29 बजे तक सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त है।

घर में ऐसे करें मां महालक्ष्मी की पूजा

सबसे पहले लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति को गंगाजल, दूध या गुलाब जल से स्नान कराकर चौकी या पीढ़ा पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर अपने सामने बायीं तरफ से पहले लक्ष्मी तब गणेश की स्थापना करें। गणेश जी को दूर्बा का और लक्ष्मीजी को कमल के फूल का आसन दें। स्वयं भी आसन ग्रहण करें। पांच घी के दीपक गणेश-लक्ष्मी के समीप जलाएं। दूध, दही, घी, गुड़ तथा शहद से पंचामृत बनाएं। मिठाई, फल आदि का अलग-अलग भोग लगाएं फिर फूल, सिन्दूर, अबीर, हल्दी के साथ कुछ द्रव्य अगर संभव हो तो चांदी के सिक्के चढ़ाएं। पान-सुपाड़ी, लौंग के साथ जल अर्पण करें। पहले गणेश की पूजा फिर लक्ष्मी की पूजा व आरती करें। पूजा के बाद अज्ञानतावश हुई भूल के लिए माफी मांग लें। मां लक्ष्मी के निर्विघ्न अपने घर में निवास करने की कामना करें।

14 की रात पंडालों में वेदी पर विराजेंगी मां काली

ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज कुमार मिश्रा ने बताया कि स्वाति नक्षत्र सौभाग्य योग ने इस बार काली पूजा की जाएगी। 14 नवंबर शनिवार को रात्रि सिंह लग्न में मां काली की प्रतिमा वेदी पर स्थापित होगी। शनिवार को अमावस्या होने के कारण इस बार काली पूजा का विशेष महत्व तथा अभिष्ट सिद्धि को देने वाली होगी। इस दिन अमावस्या तिथि 14 नवंबर शनिवार को दिन में 1: 49 मिनट में प्रवेश करेगा जो 15 नवंबर को दिन के 11:32 तक रहेगा। उन्होंने बताया कि इसी दिन लक्ष्मी, गणेश, कुबेर आदि की पूजा होगी। काली की प्रतिमा सिंह लग्न में मध्य रात्रि 12:04 रात्रि से 2:19 तक वेदी पर स्थापित की जाएगी।

दिवाली से भैया दूज तक शुभ मुहूर्त में करें कामना और आराधना

पहला दिन: धनतेरस स्वास्थ्य के लिए धन्वंतरि और समृद्धि के लिए कुबेर की जाती है। पूजा 33 कोटि देवताओं में कुबेर धन के स्वामी हैं। हड़बड़िया काली मंदिर के पंडित ज्योतिषाचार्य मनोज कुमार मिश्रा ने बताया कि कुबेर की पूजा से कभी धन की कमी नहीं होती है। मान्यता है कि इसी दिन समुद्र मंथन के दौरान हाथ में औषधि कलश लेकर धन्वंतरि प्रकट हुए थे। लोगों ने धनवंतरी की जयंती मनाई। शुभ मुहूर्त संध्या 6: 44 से रात 9: 40 बजे तक रहा।

दूसरा दिन : यम पूजा यम के नाम से दीपक जलाने से यम की यातना से मुक्ति मिलती है। शुक्रवार को यमराज की पूजा की जाएगी। यह पूजा शाम को होगी। इसके लिए चौमुखी दीपक में यम निमित जलाते हैं। इससे मृत्युपरांत यातना से मुक्ति मिलती है। मान्यता है कि श्रीकृष्ण से ने सत्यभामा को मदद नरकासुर का वध कर 16 हजार एक सौ कन्याओं को मुक्त कराया था। शुभ मुहूर्त शाम 6 बजे से रात 12 बजे तक है।

तीसरा दिन : दीपावली14 वर्ष के वनवास व रावण पर जीत हासिल कर राम आज के दिन अयोध्या लौटे थे। उनके सम्मान में नगरवासी घी के दीये जलाए थे। तब से इस दिन लक्ष्मी की पूजा होती है। जो शुभ मुहूर्त में पूजा करते हैं वह धन-धान्य से परिपूर्ण होता है। शुभ मुहूर्त कुंभ लगन 12:57 दिन से 2:28 दिन तक रहेगा। वृष लग्नः शाम 5:33 से 7:29 तक सिंह लग्नः रात 12:01 से 2:15 तक।

चौथा दिनः गोवर्धन पूजा भगवान गोवर्धन पूजा के दिन गायों को स्नान कराया जाता है। पूजा, करते हैं पशुधन के रक्षा की कामना करते हैं। गाय को धान, दुबड़ी से चुमाया जाता है। इस दिन गाय के गोबर से भगवान गोवर्धन तैयार कर पूजा की जाती है। इस दिन लोग अपने जानवरों के सिर पर मोर पंख बांधते हैं। इससे उनके पशु धन की रक्षा होती है। भगवान इंद्र के कोप से गोवर्धन पर्वत ने ही रक्षा की थी। शुभ मुहूर्त दिन 12 बजे से शाम 5 बजे तक है ।

पांचवां दिन : भैया दूज, चित्रगुप्त पूजाबहन भाई के माथे पर करती है तिलक : कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया को भाई दूज के मनेगा। इस दिन बहनें भाइयों की दीर्घ आयु की कामना करेंगी। भाई दूज के दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर तिलक कराने गए थे, क्योंकि वह अपनी व्यस्तताओं के कारण उनसे मुलाकात नहीं कर पाते थे। इस दिन ही वह अपनी बहन के घर गए थे। इसलिए यह पर्व मनाया जाता है। कायस्थ लोग इस दिन चित्रगुप्त भगवान की पूजा करते हैं वे लोग कलम दवात की पूजा करते हैं और चित्रगुप्त भगवान के सामने आय व्यय एक कागज में लिख कर उनके आगे रख देते हैं या पूजा पूरे कायस्थ समाज बड़ी धूमधाम से मनाते हैं। शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजे से शाम 5 बजे तक है ।

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