धर्म : नरक निवारण चतुर्दशी 10 को, इस दिन तय हुआ था शिव-पार्वती का विवाह

माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी का पुराणों में विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। इस साल यह चतुर्दशी 10 फरवरी को पड़ रही है। इसे नरक निवारण चतुर्दशी भी कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व होता है। इसी दिन भगवान शिव-पार्वती का विवाह तय हुआ था। यह शिव के लिए अत्यंत ही प्रिय व्रत है। नरक चतुर्दशी का व्रत करने से पापों का क्षय होता है। ज्योतिष दयानंद पाण्डेय ने बताया कि चतुर्दशी का प्रवेश 9 फरवरी को रात्रि 1:31 से है जो बुधवार 10 फरवरी रात्रि 12:30 तक रहेगा।

शिव को बिल्वपत्र पर बैर भेंट करने से मिटते हैं पाप :

इस दिन जो शिव-पार्वती और गणेश की पूजा विधि-विधान से करता है, उन पर शिव की कृपा बनी रहती है। नरक जाने से बचने के लिए नरक निवारण चतुर्दशी के दिन शिव को बिल्वपत्र पर बैर जरूर भेंट करना चाहिए। पूरे दिन निराहार रहकर शाम में तारा देखकर व्रत खोलना चाहिए। व्रत खोलने के लिए सबसे पहले बैर और तिल खाएं। इस दौरान आपको यह भी प्रण करना होगा कि मन, वचन और कर्म से जानबूझकर कभी किसी को कष्ट नहीं पहुंचाएंगे। जरूरतमंदों की यथा संभव सेवा करेंगे।

इस वजह से खास मानी जाती है तिथि

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माघ चतुर्दशी के दिन ही भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह तय हुआ था। इसी दिन हिमालय ने अपनी पुत्री पार्वती की शादी का प्रस्ताव भगवान शिव के पास भेजा था। इसके ठीक 30 दिनों के बाद फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को भगवान शिव का विवाह माता पार्वती से हुआ था। जिसे महाशिवरात्रि के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है। इसलिए तिथि का महत्व और बढ़ जाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: भाई जी कॉपी नय होतोन .......