" />
Published On: Mon, Apr 22nd, 2019

दाता मांगन शाह बिहपुर के एक हिन्दू कायस्थ परिवार में.. आज भी लाखो की होती है मुरादे पूरी -Naugachia News

बिहपुर: प्रखंड के मिल्की गांव मे दाता मांगन शाह रहमतुल्ला अलैय का सलाना उर्स .ए.पाक इलाके समेत दूर दराज से आने वाले जायरीनो की आस्था व श्रद्धा का केन्द्र है। इधर क्शेत्र के बुर्जुग बताते है कि दाता मांगन शाह एक सूफी संत थे। करीब 250 वर्ष पूर्व वे बिहपुर के एक हिन्दू कायस्थ लाल बिहारी मजूमदार के यहां रात मे रहते और पूरे दिन जन सेवा व फकीरी मे बिताते थे।

कहा जाता है कि उस दौरान किसी मामले मे उस हिन्दू कायस्थ के परिवार के सदस्य को कलकता के कोर्ट मे फांसी की सजा होने वाली थी । उस समय कलकत्ता जाने मे ही सिर्फ दो दिन का समय लगता था। लाल बिहारी जब कलकत्ता के लिए रवाना हो रहे थे तो मांगन शाह बाबा ने कहा सब अच्छा होगा। दो दिन बाद जब कलकता कोर्ट मे बहस हो रही थी तो लाल बिहारी ने उस कोर्ट में मांगन को बैठा देखा। तभी जज से फांसी का आने वाला फैसला रिहाई मे बदल गया। लाल बिहारी रिहाई के बाद दौड़ कर दाता के पास आकर बोले तुम यहां कैसे आए ? इस पर दाता ने उससे कहा कि मेरे यहां आने की बात किसी से नहीं कहना।

पलक झपकते ही कोर्ट की भीड़ से मांगन शाह अचानक गुम हो गए। लाल बिहारी घर आए खुशी मे मांगन शाह को खोजने लगे। घर के सदस्यो को बता दिया कि मांगन कलकता कोर्ट मे था। जबकि घर के सदस्यो का कहना था कि मांगन तो रोज यही पर रहता व सोता था। सभी खोजने लगे तो घर मे गुहाल मे दाता मृत मिले। तब सब को एहसास हो गया कि दाता मामूली इंसान अथवा फकीर नहीं। बल्कि सबो कि झोली भरने वाले दाता है। उन्हे सम्मान के साथ दफनाया गया। कुछ समय बाद गंगा से उनकी मजार कटने लगी। तो बब्ब उस कायस्थ परिवार को स्वप्न दिया कि गंगा से मेरा मजार कट रहा है मेरे शरीर की अस्थि को एक काली गाय के पूछ मे बांध देना और जहां वह काली गाय रुके वहा मेरा मजार होगा। वैसा ही किया गया काली गाय मिल्की गांव मे एक वट वृक्ष के नीचे आकर रुकी।

जहां आज एक बड़ा विशाल मजार नजर आ रहा है। कहा जाता है कि इन्हे दाता इस लिए भी कहा जाता है कि यहां मांगी गई सच्चे दिल से मुराद दाता जरुर पूरी करते है। ऐसी मान्यता है कि दाता के करम से महिलाओं की सूनी गोद आवाद हो जाती है। बिहपुर के मु.ईरफान आलम व विक्रमपुर के परमानंद राय ने बताया कि यहां दाता को चढ़ावे मे मिठाई व मूर्गे एवं खस्सी का पका गोश्त चढ़ाया जाता है। इस लिए इस मेले को मुर्गिया मेले के नाम से भी जाना जाता है। इस मजार पर हिन्दू, मुसलमान सभी एक साथ माथा टेक कर मुरादे मांगते है। आज भी दाता के उर्स में पहली चादरपोशी बिहपुर के हिन्दू कायस्थ स्व.लाल बिहारी मजूमदार के वंशज द्वारा करने के बाद ही आम जायरीनों की चादरपोशी होती है।

About the Author

- न्यूज़ को शेयर करे और कमेंट कर अपनी राय दे.....

Leave a comment

XHTML: You can use these html tags: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <s> <strike> <strong>

Log In

Forgot password?

Forgot password?

Enter your account data and we will send you a link to reset your password.

Your password reset link appears to be invalid or expired.

Log in

Privacy Policy

Add to Collection

No Collections

Here you'll find all collections you've created before.

error: भाई जी कॉपी नय होतोन .......