" />

क्व़ॉयल का धुआं देश में दूसरी बड़ी बीमारी को दे रहा दावत, सावधान हो जाएं

adv

मच्छर भगाने के लिए आप भी क्व़ॉयल का इस्तेमाल करते हैं तो सावधान हो जाएं। एक क्वायल सौ सिगरेट के बराबर का नुकसान करता है। ये जानकारी पुणो स्थित चेस्ट रिसर्च फाउंडेशन के शोध में सामने आई है। डॉ. संदीप साल्वी ने बताया धुआं फेफड़ों के लिए काफी नुकसानदेह है। इससे दमा और सीओपीडी का खतरा बढ़ जाता है। स्वास्थ्य के लिहाज से हवा में पीएम 2.5 का मानक 60 होना चाहिए। जबकि एक क्वॉयल जलाने के बाद कमरे में पीएम 2.5 का ग्राफ 2400 के करीब पहुंच जाता है।

शुद्ध हवा में मात्रा

नाइट्रोजन : 78.09
ऑक्सीजन : 20.95
आर्गन : 0.93
कार्बन डाइऑक्साइड : 0.4
किसको ज्यादा परेशानी
गर्भवती महिलाएं
नवजात शिशु व छोटे बच्चे

पांच साल के कम उम्र के बच्चे व बुजुर्ग
क्रोनिक ब्रोंकाइटिस व इम्फीसेमा भी सीओपीडी की बीमारी

क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) को पहले क्रोनिक ब्रोंकाइटिस व इम्फीसेमा के नाम से भी जाना जाता था। भारत में दमा से 37.86 लाख एवं सीओपीडी से 55.23 लाख लोग पीड़ित हैं। दमा से लगभग 1.84 लाख एवं सीओपीडी से 8.49 लाख लोग मौत के मुंह में समा रहे है। भारत में बीमारी से होने वाली मौतों में दूसरा सबसे बड़ा कारण सीओपीडी है। इसमें फेफड़ों के अंदर व बाहर परेशानी हो जाती है। इसमें फेफड़े के अंदर हवा जाने में परेशानी होती है। हवा जाने में रुकावट होने के कारण फेफड़े में रुकी कार्बन डाइऑक्साइड परेशान करने लगती है। इससे काफी अधिक कफ बनने लगता हैं। ऐसे में मरीज को सही इलाज नहीं मिलने से जान पर बन जाती हैं।

सीओपीडी के मरीजों में गुणात्मक वृद्धि

पीएमसीएच के मुख्य आकस्मिक चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अभिजीत सिंह एवं आइजीआइएमएस के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. मनीष मंडल के अनुसार राजधानी में वायु प्रदूषण की अधिकता के अनुसार सीओपीडी के मरीजों में गुणात्मक रूप से वृद्धि हो रही है। इसके मरीज बड़ी संख्या में हैं।

About the Author

- न्यूज़ को शेयर करे और कमेंट कर अपनी राय दे.....

Leave a comment

XHTML: You can use these html tags: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <s> <strike> <strong>

adv
error: भाई जी कॉपी नय होतोन .......