आज गणेश चतुर्थी का त्योहार.. पूरे भारतवर्ष में पूरे हर्षोल्लास और उमंग के साथ, पूजा से कई बाधाएं दूर हो जाती

गणेश चतुर्थी का त्योहार आज मनाया जाएगा. 10 दिन चलने वाले इस त्योहार पर गणपति की स्थापना और उनकी पूजा-पाठ का विशेष महत्व है. यह त्योहार पूरे भारतवर्ष में पूरे हर्षोल्लास और उमंग के साथ मनाया जाता है. मान्यता है कि भाद्रपद की चतुर्थी के दिन गणेश जी का जन्म हुआ था. गणेश जी को विध्नहर्ता कहा गया है. इनकी पूजा से कई बाधाएं दूर हो जाती हैं. साल भर के इंतजार के बाद एक बार फिर से गणपति बप्‍पा घर-घर पधारने वाले हैं. इस पर्व की सबसे ज्‍यादा धूम महाराष्‍ट्र में देखने को मिलती है. इस बार कोरोना वायरस के कारण गणेशोत्सव का रंग फीका पड़ जाएगा. चलिए आपको बताते हैं कि कैसे मनाते हैं गणेश चतुर्थी और क्‍या हैं इससे जुड़ी मान्‍यताएं और परंपराएं.

जब गणेश जी से नाराज हुए परशुराम…

पौराणिक कथा के अनुसार भगवान शंकर और माता पार्वती अपने कक्ष में आराम कर रहे थे. उन्होंने किसी को भी अंदर आने के लिए नहीं कहा था. द्वारपाल के रूप में भगवान गणेश तैनात थे. इसी बीच भगवान शिव से मुलाकात करने के लिए परशुराम जी पहुंचे. लेकिन, भगवान गणेश ने उन्हें भगवान शिव से मुलाकात करने की मंजूरी नहीं दी. इससे नाराज होकर परशुराम ने फरसे से गणेश जी का एक दांत तोड़ दिया. हालांकि, सच्चाई पता चलने पर उन्हें काफी दुख भी हुआ. इस घटना के बाद भगवान गणेश एकदंत के नाम से भी पूजे जाने लगें.

चतुर्थी तिथि को गणेश की उत्पत्ति

भगवान गणेश विघ्नहर्ता हैं. भगवान गणेश अपने भक्तों के संकट हर लेते हैं. श्रद्धा और विश्वास के साथ कोई भी व्यक्ति गणेश जी की आराधना और पूजा करता है तो उसकी सारी मनोकामना पूर्ण होती है. गणेश चतुर्थी हर वर्ष भाद्रपद मास को शुक्ल चतुर्थी को मनाई जाती है. मान्यता है कि चतुर्थी तिथि को ही विघ्नों का नाश करने वाले और ऋद्धि-सिद्धि के दाता भगवान गणेश की उत्पत्ति हुई थी. भगवान गणेश भक्तों की पुकार तुरंत सुनते हैं और मनचाहा वरदान भी देते हैं.

गणेश जी के गजानन बनने की कहानी

पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार माता पार्वती स्नान के लिए गयीं. उन्होंने द्वार पर गणेश जी को बिठा दिया. माता पार्वती ने गणेश जी को बिना उनकी इजाजत के किसी को भी अंदर नहीं आने देने को कहा था. इसी दौरान भगवान शिव पहुंचे और अंदर जाने की कोशिश करने लगें. जब गणेश जी ने उन्हें रोका तो क्रोधित होकर भगवान शिव ने गणेश जी का सिर धड़ से अलग कर दिया. जब माता पार्वती बाहर निकलीं तो यह देखकर व्याकुल हो उठीं. उन्होंने भगवान शिव से गणेश जी को बचाने के लिए कहा. भगवान शिव ने गणेश जी को हाथी का सिर लगा दिया. इस तरह भगवान गणेश गजानन के नाम से भी पूजे जानें लगे.

गणेश भगवान को प्रिय है मोदक

गणपति की स्थापना करते समय कुछ जरूरी बातों का सबसे ज्यादा ध्यान रखनी चाहिए. गणेश जी की मूर्ति का मुंह पूर्व की दिशा की तरफ होनी चाहिए. गणेश जी की पूजा शुरू करने से पहले संकल्प लेना होता है. इसके बाद भगवान गणेश का आह्वान किया जाता है. इसके बाद भगवान गणेश के मंत्रों के उच्चारण के साथ मूर्ति की स्थापना की जाती है. भगवान गणेश को धूप, दीप, फूल, फल, मोदक, वस्त्र, अर्पित किए जाते हैं. इसके बाद भगवान गणेश की आरती उतारी जाती है. प्रसाद में मोदक जरूर रखें. भगवान गणेश को मोदक काफी प्रिय है.

क्या होता है मोदक का मतलब ?

पुराणों में मोदक का वर्णन मिलता है. मोदक का अर्थ खुशी होता है और भगवान श्रीगणेश हमेशा खुश रहा करते थे. इसी वजह से उन्हें गणेश चतुर्थी पर मोदक का भोग लगाया जाता है. भगवान गणेश को ज्ञान का देवता भी माना जाता है और मोदक को भी ज्ञान का प्रतीक माना जाता है. इस वजह से भी उन्हें मोदक का भोग लगाया जाता है.

गणेश चतुर्थी पर भूलकर भी ना देखें चांद

गणेश चतुर्थी के दिन गणेशोत्सव में भगवान गणेशजी की 10 दिन के लिए स्थापना करके उनकी पूजा-अर्चना की जाती है. कुछ राज्यों में गणेशोत्सव तीन दिन तक ही चलता है. बाद में प्रतिमा का विसर्जन कर दिया जाता है. गणेश चतुर्थी को लेकर कई तरह की मान्यताएं हैं. एक मान्यता यह है कि इस दिन चंद्रमा का दर्शन करने से पाप लगता है. मान्यताओं के अनुसार जो व्यक्ति इस दिन चंद्रमा के दर्शन कर लेता है उस पर झूठा आरोप लगता है.

आपको क्यों नहीं देखना चाहिए चांद?

मान्यताओं के अनुसार जब भगवान गणेश को हाथी का सिर लगाया गया तो उन्होंने पृथ्वी की सबसे पहले परिक्रमा की और प्रथम पूज्य कहलाए. सभी देवताओं ने उनकी वंदना की, लेकिन अपने रूप के घमंड में चांद उन पर हंसने लगा. इससे गणेशजी ने गुस्से में आकर चंद्रमा को काले होने का श्राप दिया. चंद्रमा को गलती का अहसास हुआ, उसने गणेश जी से माफी मांगी. प्रसन्न होकर गणेशजी ने कहा कि जैसे-जैसे सूर्य की किरणें उन पर पड़ेंगी, चमक लौट आएगी.

चांद देखने पर करें इस मंत्र का जाप

गणेश चतुर्थी के दिन चांद को क्यों नहीं देखना चाहिए इसके बारे में आप जान गए. इसके बावजूद अगर आपने इस दिन गलती से चांद देख लिया तो घबराए नहीं. आपको इस दौरान एक खास मंत्र का जाप कर लेना चाहिए. ये मंत्र है-

सिंह: प्रसेन मण्वधीत्सिंहो जाम्बवता हत:,

सुकुमार मा रोदीस्तव ह्येष:स्यमन्तक:।

भगवान गणेशजी की भोग सामग्री

गणेश चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी तक यानी कि जब तक भगवान गणेशजी घर में रहते हैं तब तक उनका मेहमान की तरह ध्‍यान रखा जाता है. गणपति को दिन भर में 3 बार भोग लगाना अनिवार्य होता है. वैसे गणपति को मोदक अति प्रिय होते हैं. इसलिए इसका भोग लगाना चाहिए. लेकिन आप चाहें तो गणेश जी को बेसन के लड्डू का भी भोग लगा सकते हैं.

भगवान गणेशजी की पूजन सामग्री

गणेश जी की पूजा के लिए गणेश प्रतिमा, जल कलश, पंचामृत, लाल कपड़ा, रोली, अक्षत यानी साबुत चावल, कलावा, जनेऊ, इलाइची, नारियल, चांदी का वर्क, सुपारी, लौंग पंचमेवा, घी, कपूर, पूजा के लिए चौकी, लाल कपड़ा और गंगाजल इत्यादि चीजों को इकट्ठा कर लें.

इस तरह करें भगवान गणपति की पूजा

गणेश भगवान की प्रतिमा की स्‍थापना के बाद गणेश जी को सिंदूर लगाएं. गणपति की मूर्ति के पास तांबे या चांदी के कलश में जल भरकर रख लें. उस कलश को गणपति के दांई ओर रखें और उन्हें चांदी का वर्क लगाएं, इसके उपरान्त उन्हें जनेऊ, लाल पुष्‍प, दूब, मोदक, नारियल आदि सामग्री अर्पित करें. आखिरी में उनकी आरती उतारें और भोग लगाएं.

भगवान गणेश की मूर्ति स्थापना की विधि

गणेश चतुर्थी के दिन दोपहर में गणेश मूर्ति की स्थापना की जानी चाहिए. मूर्ति स्थापना के लिए सबसे पहले एक लाल वस्त्र चौकी पर बिछाएं. फिर उस लाल वस्त्र पर अक्षत छिड़कें और उसके ऊपर भगवान गणेश की मूर्ति को स्थापित करें. इसके बाद गणेश भगवान को स्नान कराएं. रिद्धि-सिद्धि के रूप में प्रतिमा के दोनों ओर एक-एक सुपारी भी रखें, इसके बाद भगवान गणेश जी की अराधना करें.

पूर्व दिशा की ओर रखें मूर्ति का मुंह

गणपति की स्थापना यदि आप करते हैं तो इस बात का ध्यान रखें कि मूर्ति का मुंह पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए. गणेश पूजा शुरू करने से पहले संकल्प लेना अनिवार्य होता है, इसके बाद भगवान गणेश का आह्वान करें. इसके बाद गणपति की मंत्रों के उच्चारण के बाद स्थापना करें. भगवान गणेश को धूप, दीप, वस्त्र, फूल, फल, मोदक अर्पित किए जाते हैं. इसके बाद भगवान गणेश की आरती उतारी जाती है.

गणपति स्थापना के लिए विशेष मुहूर्त

इस बार 21 अगस्त यानि आज 11 बजे सुबह से चुतुर्थी तिथि शुरू हो गई है और 22 अगस्त कल 7 बजकर 57 मिनट शाम तक चुतुर्थी तिथि रहेगी. इसमें राहुकाल को हटाकर आप गणपति की स्थापना करने का काम कर सकते हैं. पूजन का शुभ मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक है. विशेष मुहूर्त सुबह 11 बजकर 45 मिनट से दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक रहेगा. पूजन का शुभ मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 45 मिनट है. विशेष मुहूर्त सुबह 11 बजकर 45 मिनट से दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक है.

कब से शुरू होगी गणेश चतुर्थी तिथि

कल गणेश पूजा है. आज रात में ही गणेश चतुर्थी तिथि शुरू हो जाएगी. आज 21 अगस्त दिन शुक्रवार की रात 11 बजकर 02 मिनट से गणेश चतुर्थी तिथि लग जाएगी और यह 22 अगस्त दिन शनिवार की शाम 07 बजकर 57 मिनट तक रहेगी. ऐसा माना जाता है कि गणेश जी का जन्म दोपहर के समय में हुआ था, इसलिए इनकी पूजा दोपहर के समय की जाती है. इस बार 22 अगस्त के दिन भगवान गणपति की पूजा के लिए दोपहर में 02 घंटे 36 मिनट का शुभ समय है. इस साल आप दिन में 11 बजकर 06 मिनट से दोपहर 01 बजकर 42 मिनट के बीच विघ्नहर्ता गणेश जी की पूजा कर सकते हैं.

गणेश चतुर्थी पूजा का है विशेष महत्व

विघ्नहर्ता श्रीगणेश के जन्मोत्सव के रूप में गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है. ऐसी मान्यता है कि सभी देवों में प्रथम पूजनीय गणेश जी की उत्पत्ति इसी शुभ मौके पर हुई थी. गणेश चतुर्थी के दिन भक्त गणपति बप्पा को अपने घर लाते हैं और उन्हें स्थापित करते हैं. इसके बाद भक्त गणेश जी का विशेष आशीर्वाद पाने के लिए गणेश चतुर्थी पर पूजा अर्चना करते हैं. इस दौरान 10 दिन तक भगवान गणेश जी की सेवा की जाती हैं और उनसे जीवन में सुख समृद्धि और कामयाबी की कामना करते हैं. गणेश चतुर्थी के ग्यारहवें दिन भक्त उन्हें विसर्जित करते हैं और अगले बरस जल्दी आने की प्रार्थना करते हैं. गणपति बप्पा का आशीर्वाद मिलने से जीवन की कठिनाइयां दूर हो जाती हैं.

जानिए गणपति पूजन का शुभ मुहूर्त

गणेश पूजा मुहूर्त 22 अगस्त की मध्याह्न में सुबह 11 बजकर 06 मिनट से दोपहर 01 बजकर 42 मिनट तक है

चतुर्थी तिथि प्रारम्भ 21 अगस्त की रात 11 बजकर 02 मिनट पर

चतुर्थी तिथि समाप्त 22 अगस्त शाम 07 बजकर 57 मिनट तक

मूर्ति विसर्जन 1 सितंबर को किया जाएगा.

इस तरह से करें प्रतिमा की स्थापना

कल गणेश चतुर्थी है. इस दिन सुबह स्नान, नित्य कर्म से निवृत होकर गणेश जी की प्रतिमा बनानी चाहिए. प्रतिमा सोने, तांबे, मिट्टी, या गाय के गोबर आदि से बनानी चाहिए. एक कोरे कलश को लेकर उसमें जल भरकर उसमें सुपारी डालें और उसे कोरे कपड़े से बांधना चाहिए, इसके बाद चौकी स्थापित करें और उस पर कलश के साथ गणपति की प्रतिमा स्थापित करें.

विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा विधि

भगवान गणेश जी की प्रतिमा पर सिंदूर, केसर, हल्दी, चन्दन,मौली आदि चढ़ाकर मंत्रोचार के साथ उनका पूजन करे. गणेश जी को दक्षिणा अर्पित कर उन्हें 21 लड्डूओं का भोग लगाएं. गणेश प्रतिमा के पास पांच लड्डू रखकर बाकी ब्राह्मणों और गरीबों में बांट देना चाहिए. ध्यान रहे गणेश जी की पूजा मध्याह्न यानि दोपहर के समय करनी चाहिए.

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error: भाई जी कॉपी नय होतोन .......